आयुर्वेद के अनुसार कई रोगों में उपयोगी है दूधी घास
आयुर्वेद के अनुसार कई रोगों में उपयोगी है दूधी घास
दूधी घास को तोड़ने पर उसमें से दूध सा सफेद पदार्थ निकलता है, इस कारण इसे दूधी घास कहा जाता है। इसके अनेक औषधीय गुण आयुर्वेद में इसे खास बनाते हैं
अस्थमा की समस्या में फायदेमंद अस्थमा के मरीजों के लिए दूधी घास काफी फायदेमंद साबित होती है। ऐसे लोगों को इसका काढ़ा बनाकर सुबह और शाम गुनगुना करके पीना चाहिए।
खांसी से परेशान हों तो अगर आप खांसी से परेशान हैं तो दो कप पानी में एक चम्म्च दूधी घास का चूर्ण तब तक उबालें, जब तक कि वह आधा न रह जाए। इसे ठंडा कर छान लें। इसे आधा-आधा चम्मच सुबह-शाम गुनगुना कर पिएं।अगर झड़ते हों सिर के बाल अगर आपके सिर के बाल झड़ते हैं तो दूधी का रस आपके लिए वरदान साबित हो सकता है। इसके लिए कनेर के कुछ पत्तों को दूधी के रस की सहायता से पीसकर सिर पर लगाएं और दो घंटे बाद धो लें। इस बात का ध्यान रखें कि इस दौरान आंखों को बचाना है। अगर आप पथरी से परेशान हैं तो इसके पत्तों को उबालकर काढ़ा बना लें और दो-दो चम्मच सुबह-शाम देना लाभकारी होता है।
डायबिटीज में दे आराम पानी या दूध में इसका दो से चार ग्राम चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम पीने से डायबिटीज के रोगियों को लाभ होता है। उपयोगी है घास दूधी के पत्ते, जड़, डंठल, फूल एवं दूध आदि सभी बहुत उपयोगी होते हैं। इसे कूटकर इसका रस निकाला जाता है या फिर इसे उबाल कर इसका काढ़ा बनाया जाता है। समस्या के हिसाब से इसकी दो से चार चम्मच मात्रा एक बार में लेनी चाहिए।
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