Tuesday, March 10, 2020

जानलेवा साबित हो सकती है एक गलती

जानलेवा साबित हो सकती है एक गलती 

एक महिला को अपने शरीर पर  अधिकार होना चाहिए। दुर्भाग्य से हमारे समाज में स्त्री की सेहत चिंता का विषय नहीं मानी जाती। खुद स्त्रियां भी प्रेग्नेंसी जैसे महत्वपूर्ण फैसले स्वयं नहीं लेती। यही वजह है की लगभग हर दूसरी स्त्री को जीवन में कभी न कभी  अनचाही प्रेग्नेंसी का सामना करना पड़ता है। इसमें भी एक बड़ी गलती वे अपने मन गर्भपात दवा खाकर करती हैं ,जिसका खामियाजा उनकी सेहत को चुकाना पड़ता है। रिपोर्ट्स बताते हैं की हर दिन असुरक्षित गर्भपात के कारण भारत  लगभग आठ महिलाओं की मौत हो  है। यह नहीं , वजह से  कई बार महिलाएं गंभीर  से पड़ जातीं हैं। 
Pregnant woman

अल्ट्रासॉउन्ड है ज़रूरी 
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार ,भारत में लगभग 26 प्रतिशत गर्भपात घर में होते हैं। लगभग 4.8 करोड़ प्रेग्नेंसी (प्रतिवर्ष ) के मामलों में 48 प्रतिशत अनचाही प्रेग्नेंसी होती है और इनमें 33 प्रतिशत में गर्भपात कराया जाता है ,फोर्टिस ,वसंत कुंज ,बिना डॉक्टर की सलाह के गर्भपात की दवा  से कई नुक्सान हो सकतें हैं। अगर प्रेग्नेंसी  एडवांस ,है यानी 2 -3 महीने हो चुके हैं तो दवा से अत्यधिक रक्तस्त्राव हो सकता  है।  ऐसे इमरजेंसी में डीएंडसी (सफाई )करनी पड़ती है। सात हफ्ते  प्रेग्नेंसी में दवा कारगर हो सकती है ,लेकिन इसके बाद डॉक्टर एमटीपी कराते  ,हैं  क्योंकि इसमें या तो अत्यधिक रक्तस्त्राव हो  सकता है फिर अपूर्ण गर्भपात हो  सकता  है। एक समस्या  यह भी है की अगर लड़की का ब्लड ग्रुप नेगेटिव है और  उसके पार्टनर का पॉजिटिव है तो उसे एक एमटीपी इंजेक्शन लेना पड़ता है ,अन्यथा भविष्य में प्रेग्नेंसी में परेशानी आ  सकती है। ये कुछ वजहें है ,जिस वजह से डॉक्टर की सलाह ज़रूरी होती है। 99 प्रतिशत मामलों में आसानी से प्रेग्नेंसी टर्मिनेट हो सकती है ,लेकिन यह डॉक्टर की देखरेख में होनी चाहिए। 

डॉक्टरी सलाह बिना दवा नहीं 

प्रेग्नेंसी टर्मिनेट कराने से पहले अल्ट्रासॉउन्ड कराना ज़रूरी है ताकि पता चल सके की प्रेग्नेंसी एक्टोपिक तो नहीं है। एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में गर्भाशय की जगह फेलोपिन ट्यूब में भ्रूण रहता है। कभी -कभी अपनी मर्जी से गर्भपात की दवा लेने से यह ट्यूब फट भी जाती है। जब उन्हें लम्बे समय से रक्तस्त्राव हो रहा होता है ,इससे उनके शरीर में खून की कमी हो जाती है।  नियम यह की अबॉर्शन के लिए दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के न ली जाए। कई महिलाएं एमर्जेन्सी पिल्स महीने में दो -दो बार ले लेती हैं। एमर्जेन्सी पिल्स का मतलब आपातकालीन दवा। ये हार्मोनल चक्र गड़बड़ा   है। डॉक्टर खासतौर पर पहली प्रेग्नेंसी को टर्मिनेट कराने की सलाह  नहीं देते। इसकी वजह  की अगर में गर्भधारण में  समस्या हुई तो हमेशा जे लिए पच्छ्तावा  जाता है। 

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Monday, March 9, 2020

यह स्वाद का नहीं पेट का मामला है।


यह स्वाद का नहीं पेट का मामला है। 

spiceपेट में दर्द है ?क्या कब्ज की शिकायत रहती है ,गले की जलन ने परेशान कर रखा है ?हां भई हां..... ऐसे   जाए की आपकी समस्या  समाधान  रसोई और मसालदान  छिपा है तो ?

भारतीय रसोई का जिक्र छिड़े और उसके स्वाद के चटकारो का जिक्र ना हो ,उसके मसालों और हर्ब्स  की खुशबू की चर्चा ना हो, भला यह कैसे हो सकता है।  दुनिया के कोने - कोने में इनका डंका बोलता है।  वो, यूं ही नहीं है रसोई में मौजूद मसालदान स्वाद से भरा होने के साथ ही साथ खूबियों  से भी भरपूर है।  उसमें मौजूद तमाम मसाले और हर्ब्स  हमें सेहत का वरदान देते हैं।  उसमें से ढेरों ऐसे हैं जो आपके पेट और हाजमे की समस्या को झट से दूर करने की कुव्वत  रखते हैं।  हां, यह बात अलग है कि कई बार हम उनकी इस खूबी को जानते -पहचानते नहीं है। 

अदरक आएगी काम 
अदरक, क्या हुआ  ? थोड़ी कसेली जरूर होती पर यकीनन  आपकी रसोई में भी उसका इस्तेमाल किसी न किसी शक्ल  में  होता होगा। अगर नहीं तो आज से ही शुरु कर दीजिये।अदरक में एंटीमाइक्रोबियल खूबी होती है।  मतलब  यह खराब बैक्टीरिया को नष्ट करने का  काम करती है।  जिसके चलते बदहजमी ,मिचली  से  लेकर पेट फूलने तक के लिए रामबाण साबित होती है।  पाचन के साथ हीं  वजन को नियंत्रित करते हैं।  द कंपलीट बुक आफ आयुर्वैदिक होम रैमडिजकी माने।  तो खाने के पहले थोड़ी - सी अदरक कुछ बूँद नींबू का रस और एक चुटकी नमक के मिश्रण को खाएं। हाजमे की परेशानी दूर हो जाएगी। 

काम की  है काली मिर्च 
उसकी याद आपको कब आती है ?सलाद ,रायते आदि के स्वाद में इज़ाफ़ा करने या फिर गले में खराश होने। पर ,क्या कभी उसे आपने पेट की समस्या के लिए प्रयोग किया है ? हैरानी हो रही है ? पर सच है कि छोटी - सी काली मिर्च खुद में ढेरों खुशियां को समेटे  है।  उसमें मैग्नीशियम , विटामिन  -के,सी और फाइबर की मौजूदगी  होती है।  इसके सेवन से लार और गैस्ट्रिक जूस की मात्रा बढ़ती है। जिसके चलते गैस, कब्ज और दस्त आदि से राहत मिलती है। यह मिर्च हाजमे को भी एकदम दुरुस्त रखती है, एसिडिटी से भी बचाती है और भूख को बढ़ाती है।अगर आपको पेट दर्द की समस्या रहती है तो आप रोज खाली पेट एक चम्मच शहद के साथ- 2 काली मिर्च पीसकर खा सकती हैं। 

लौंग को भी आजमाएं 
लॉन्ग में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन  -सी, कैल्शियम, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर सरीखे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं।  लॉन्ग में मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीस्पामोडीक गुण पाचन तंत्र को ठीक रखते हैं।  आप चाहे तो लॉन्ग वाली चाय पी सकती हैं।  बस उसमें जरा - सा नमक डाल दें। इस चाय को सुबह - सुबह या रात में पिए।  या फिर लोंग का पानी भी पिए आपके काम आएगा।  लॉन्ग सीधे चबाकर भी खाई जा सकते हैं।  आप 2 -3  लौंग  को आग में भूनकर भी खा सकते हैं। 

दालचीनी है  काम की 
अक्सर दादी  -नानी के नुस्खों में अपन या नाम सुना होगा यह साल आपके शरीर को गर्म रखने के साथ ही रक्त संचार को भी संतुलित रखता है। और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसमें एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण भी होते हैं इसका प्रयोग आपको अल्सर  से बचाता है या नहीं आपके  पाचन को दुरुस्त रखता है। इसमें मौजूद मिनरल मैगनीज  फाइबर और एसेंशियल ऑयल पेट संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करते हैं।  दालचीनी मिलाकर पिया जा सकता है दस्त रोकने के लिए दिन में दो बार पानी के साथ 3 ग्राम दालचीनी का इस्तेमाल करें उसके साथ दालचीनी, अदरक, और जीरे का पाउडर बराबर मात्रा में मिलाकर एक चम्मच मिश्रण बना लें।  इस मिश्रण को दिन में 2 से 3  बार लेने से दस्त में राहत मिलती है। दालचीनी पाउडर और शहद की जुगलबंदी भी खासी कारगर होती है। 

हल्दी लाएगी रंग 

हल्दी एंटीसेप्टिक है या तो आप जानती हिन् होंगी  | पर अब यह भी जान लीजिए कि और सूजन कम करने में भी उपयोगी साबित होती है। उसके प्रयोग पर चलते गैस नहीं बनती, बदहजमी से निजात मिलती है।  साथ ही यह लीवर के लिए भी खूब अच्छी होती है।  लीवर की समस्या के लिए हल्दी का पानी किसी औषधि से कम नहीं है।  हल्दी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। 

पिपरमेंट  देगी ठंडक 
पिपरमेंट का नाम आते हैं उसकी खुशबू का ख्याल आ जाता है। बस वही सुगंध आपके पेट के लिए कारगर साबित होती है।  यह आपको रिफ्रेश तो करती  हैं, चाहते हैं ठंडक देती है जिसके चलते एसिडिटी में कमी आती है। 

फायदेमंद है लहसून 

चटनी या फिर दाल में लहसुन का तड़का।  भई वाह ,स्वाद  दोगुना हो जाता है।  पर, इससे इतर  इसमें तमाम औषधीय गुणों के साथ ही एंटीमाइक्रोबॉयल खूबी भी मौजूद है।  यह पेट को दुरुस्त रखने के साथ ही दिल को भी दुरुस्त रखता है।  आप चाहे तो इसका प्रयोग खाली पेट कैप्सूल की तरह कर सकती हैं या फिर खाली पेट लहसुन को पानी में खोला कर उस पानी को भी पिया जा सकता है। 

भूख बढ़ने के लिए सौंफ 

सौंफ  जिसे अक्सर हम माउथ फ्रेशनर के तौर पर खाना खाने के बाद इस्तेमाल करते हैं। पर क्या आप जानती हैं कि इसका इस्तेमाल खाने के पहले करना आपकी भूख  में इजाफा कर सकता है ? इसकी खुशबू भी से भूख लगती है और खाना खाने का मन करता है।  इसमें मौजूद फाइबर खाने को पचाने का काम करता है। सौंफ आप कच्चा खा सकती हैं।  भुने सौंफ  का इस्तेमाल रेसिपी में कर सकते हैं।


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Sunday, March 8, 2020

Child upbringing

Child upbringing

aDid you brush? Yes, mother. But is this brush too dry? Where did this chocolate come from? What chocolate is in your hand? This granny has often made excuses, lies and you get worried about their behavior. Sometimes you get angry at them, sometimes they face a beating. You are obliged to do so. However, it is not necessary that your way of dealing with this problem is correct. The condition is a lie is a symptom. No behavior. So, by some things your child lies? How does he lie? Does he even steal with her? By keeping a few things like this in mind and including some things in your habit, you can protect your children from the habit of lying.


Don't be judgmental (child  upbringing)

Suppose your child lied and you caught him. So what will you do You will interrupt him. You may even tell him that you are a liar. A very small word is false. Even more lies will be lied to you. If you take a lie, do not react to it immediately. Even scolding him will not help. By doing this, he will lie even more to prove himself to be true, he will start to disillusion. While ignoring your lies will make him realize his mistake and encourage him to tell the truth.

Help to increase self confidence (child  upbringing)

The child learns what he sees. You should not say in front of him son, do not tell Papa that we went to the market, do not tell grandma that we had eaten non-veg, know many times - unknowing child learns to lie to his house, school friends etc. In such a situation, do a lot of things yourself, try to change the habits of the people of your household. Make home the first school of truth for the child. Avoid using false pretenses in front of the child.

Understand that and make easy access (child upbringing)
You may have noticed that a child tells the same thing to two different people in different ways or sometimes it happens that he speaks the truth to one person in the house, but by adding that don't tell anyone else This means that the child is telling the truth from one person and lying to another. Because with whom the child is telling the truth, he can find it close to himself or not easily reach it. And that person also understands his point. If you also want to listen through the mouth of the child, then make the necessary changes in your nature. Try to understand the mood of the child, the action will not repeat.

Do not give preference
Children start lying at a very young age. Like they have eaten chocolate, which is clearly revealed by the chocolate on their mouth. That but he says that we did not eat chocolate, we laugh at seeing and seeing it. And many times we leave him again and again he reminds them about it and motivates them to do so and make a false lie. This time of the child, it should be avoided to give up the habit, with old age they have movement and recruitment as well as lies and maturity.

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जकड़ न ले ये अकड़न

जकड़ न ले ये अकड़न 
(Female backpain)

सुबह उठने पर शरीर में होने वाली अकड़न आम बात है। लकिन इसे हल्के में लेना भारी पर सकता है। जोड़ों में होने वाले समान्य दर्द के पीछे बड़े कारण हो सकतें है। 

a woman with painबीस साल पहले का समय याद करूं तो दादी की फुर्ती देखते बनती थी। सुबह मेरा और उनका साथ ही उठना होता था। मां कभी कमर दर्द की शिकायत भी कर दे तो ताना मिलता था ,हमसे ज्यादा तो ये बुढ़ी हो गई है। जब मैं मां की उम्र की हुई ,तो मैं भी उनकी तरह कभी कमर दर्द तो कभी जोड़ों के दर्द  की शिकायत करने लगी। शरीर को अकड़न और जोड़ों का दर्द अब उम्र का तकाजा देखकर नहीं आता। सुबह आंख खुलने के बाद बिश्तार से नीचे पाँव रखने में करीब पंद्रह मिनट लग जातें हैं। कभी कंधे अकड़े होते हैं ,तो कभी एड़ियां दर्द से कराह रही होती है। पैर मोड़ो तो घुटना जवाब देने लगता है। दो दशकों के फासले में तेज हो चुकी है। सुबह -सुबह होने वाली ये अकड़न और दर्द कुछ कहानी हैं ,आप भी सुनें :

ये संकेत हैं बीमारियों के (Female backpain)

खानपान और जीवनशैली है जिम्मेदार (Female backpain)
हमारा खानपान  और जीवनशैली किसी गैजेट्स  फीचर्स की तरह तेजी से बदलने लगे हैं।  इसके कारण 60 की उम्र में होने वाली समस्याएं अब 40 की उम्र में होनी शुरू हो चुकी है।बाहर का खाना हमारी जीवनशैली का हिस्सा बन चूका है।   सिर्फ सुविधाओं की प्राथमिकता देने की हमारी आदत ने हमारा ध्यान से भटका दिया है दरवाजे पर  आने वाला खाना कैसा है हमें नहीं पता इसके अलावा जल्दबाजी और स्वाद के कारण जंक फूड को हम इस कदर अपना चुके हैं कि शरीर को पर्याप्त पोषण  नहीं मिल पाता। नियमित रूप से इस तरह के भोजन का सेवन करने से खून में विषाक्त तत्वों की मात्रा बढ़ती है।  यहां समझने की जरूरत है कि दवा दुकानों में मिलने वाले सप्लीमेंट खाद्य पदार्थों से मिलने वाले प्राकृतिक पोषण की भरपाई नहीं कर सकते।  इसके अलावा खराब जीवनशैली भी शरीर में होने वाले इस अकरम के लिए खासी जिम्मेदार है। लगातार  बढ़ रही व्यस्तता के कारण व्यायाम व प्रकृति से हमारा नाता टूट -सा गया है। घरों के भीतर रहना , सूर्य की पर्याप्त रोशनी ना मिल पाना और नींद का खड़क टाइम टेबल भी हड्डी और मांस पेशियों की तकलीफों का जिम्मेदार है।

 कुछ कदम उपचार की ओर (Female backpain)

  • समस्या का उपचार उसके कारणों पर नियंत्रण से होता है। बात हार्मोन में बदलाव की हो या पोषण की ,आपको अपने भोजन पर ध्यान  ज़रुरत है। आपको तय करना होगा कि शरीर को सभी प्रकार के पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिले।  कई दफा फिगर का ख्याल रखने के चक्कर में की गई  डाइटिंग  भी पोषण में कमी ला देती है।  वजन कम करने के लिए किसी भी प्रकार का है डाइट अपनाने से अच्छा है कि आप संतुलित आहार लें और नियमित रूप से व्यायाम करें

  • जोड़ों में होने वाले  दर्द के लिए में कैल्शियम की कमी भी ज़िम्मेदार होती है। शरीर  में कैल्शियम की दरकार को पूरा करने के लिए चिकित्सक की सलाह से कैल्शियम और विटामिन -डी का सप्लीमेंट ले सकती हैं। 
  • विटामिन - डी को प्राकृतिक तौर पर लेने की कोशिश जरूर करें विटामिन डी शरीर में कैल्शियम को हड्डियों तक पहुंचाने का काम करता है।  विटामिन -डी की कमी से शरीर के भीतर कैल्शियम बेकार हो जाता है।  इसके लिए हर सुबह 20 मिनट 50% खुले बदन  में सूरज की रोशनी में बिताएं। 
  • जीवनशैली कितनी भी व्यस्त हो, 30 मिनट टहलना  ना भूलें टहलने से रक्त संचार अच्छा होता है और विषाक्त शरीर में जमा नहीं हो पाते। 
  • सुबह उठने पर शरीर में होने वाली अकड़न  को हल्के में न लें। इसे गंभीर समस्या बनने से पहले चिकित्सकीय सलाह  जरूर लें। 
  • सिंकाई और  तेल मालिश वाले नुस्खे का इस्तेमाल भी चिकित्सक की सलाह के अनुरूप 

ब्रेड नहीं रहेगा बोरिंग

ब्रेड नहीं रहेगा बोरिंग
Bread  recipe 


breadब्रेड - जैम और ब्रेड - बटर खाकर अगर आपका परिवार भी बोर हो चुका है तो आपको भी ब्रेड टॉपिक के मामले में कुछ नए प्रयोग करने की जरूरत है बोरिंग  ब्रेड को कैसे बनाएं मजेदार।

आमतौर पर महिलाओं के पास हर दिन एक ही सवाल आता है कि नाश्ते में क्या बनाएं रोज - रोज वही ब्रेड - मक्खन और ब्रेड - जैम खाकर घर के लोग बोर हो चुके हैं| हर सुबह कम समय में बनने वाला सबका पसंदीदा नाश्ता तैयार करना वैसा ही आसान काम नहीं है।  ऐसे में तरह-तरह के टॉपिंग आपकी परेशानी को दूर कर सकते हैं।  यह टॉपिंग्स ना सिर्फ स्वादिष्ट हैं बल्कि सेहतमंद भी। 

सोयाबीन और फलों की टॉपिंग (Bread  recipe)
 यह विकल्प खास तौर पर कामकाजी  महिलाओं को जरूर पसंद आएगा क्योंकि यह रेसिपी फटाफट तैयार होती है इस विकल्प के साथ अपना सुबह के नाश्ते को ज्यादा पौष्टिक बना सकती हैं।  इसे तैयार करने के लिए ब्रेड की स्लाइस और उस पर सोयाबीन स्प्रेड फैलाएं उसके बाद ब्रेड पर अपना कोई भी पसंदीदा फल जैसे केला स्ट्रौबरी या कीवी आदि के सलाईस  या बदाम ,किसमिस खजूर अखरोट आदि रखे ऊपर से सोयाबीन स्प्रेड लगी हुई ब्रेड की स्लाइस रखें लगा हुआ हिस्सा ऊपर की तरफ न हो।  सोयाबीन, प्रोटीन ,विटामिन और खनिजों का भंडार हैं और मेवों के साथ मिलकर नाश्ता पावर हाउस की तरह काम करता है। 


पनीर टोस्ट (Bread  recipe)
पनीर नमकीन और मीठे  दोनों रूप में खाया जा सकता है पनीर में भरपूर मात्रा में प्रोटीन कैल्शियम विटामिन -डी और ओमेगा -3 भी पाया जाता है।  ब्रेड के साथ पनीर की टॉपिंग  खाने में स्वादिष्ट तो होती ही है ,साथ ही शारीरिक और मानसिक विकास में भी सहायक होती है. ब्रेड को टोस्ट करें और उसके ऊपर कद्दूकस किया हुआ  पनीर फैलाएं ,उसके ऊपर काली मिर्च पाउडर व नमक बुरक दे|  खीरा, उबला हुआ आलू या चिकन या प्याज की स्लाइस रखें ऊपर से एक और ब्रेड टोस्ट रखें और सर्व करें। तरह-तरह से एक्सपेरिमेंट करके आप स्टॉपिंग को और ज्यादा स्वादिष्ट बना सकती है | 

 एग भुर्जी (Bread  recipe)
 अंडा दुनिया भर में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले खाद विकल्पों में से एक है। पौष्टिक गुणों से भरपूर अंडे को आप नाश्ते में आमलेट, उबले हुए अंडे या एक भुर्जी के रूप में इस्तेमाल कर सकती है।  जब अंडे से बने व्यंजन की बात आती है तो इसे कोई 'ना' नहीं कहेगा पोषक तत्वों से भरपूर एक भुर्जी को नाश्ते की प्लेट में शामिल करने की जगह ब्रेड की स्लाइस के ऊपर रखकर खाएं।  नॉनस्टिक पैन में थोड़ा सा - तेल गर्म करें 2 अण्डों को फेंटकर पैन में अच्छे से पकाएं।  इसमें स्वादानुसार नमक काली मिर्च पाउडर और चीज़ मिलाएं। ब्रेड टोस्ट के ऊपर  इसे रखें और सर्व करें।

मशरूम और पोच्ड अंडे (Bread  recipe)
क्या आपने कभी मशरूम के साथ पोच्ड  एग खाया है? अगर नहीं, तो इस बार जरूर ट्राई करें इसके सेवन से डायबिटीज और दिल की बीमारियों में फायदा मिलता है वैसे क्या आप जानती हैं कि एग भूर्जी और पोच्ड एग में क्या अंतर होता है? अंडो को पोच्ड करने के लिए उबलते हुए पानी में सीधे फोड़कर कर डाल दिया जाता है, पर यह उबले अण्डों से अलग होता है | अण्डों को पोच्ड करने पर इसके अंदर का पीला भाग वैसा ही रहता है  और सफ़ेद भाग पक जाता है इसको बनाने के लिए 8-10 मशरूम को काट ले |  पैन में हल्का सा तेल गर्म करें और उसमें  मशरूम को पका लें | उसमें नमक और काली मिर्च मिलाएं और ब्रेड के स्लाइस पर फैलाए उसके ऊपर पोच्ड  एग रखें | नमक व काली मिर्च पाउडर छिड़के और स्वादिष्ट रेसिपी का मजा ले | 


अवकार्डो स्प्रेड (Bread  recipe)
यदि आप चाहतें है की सुबह का नास्ता ऐसा हो , जिसे खाने से वजन भी न बढे और सेहत भी अच्छी रहे , तो इसके लिए अवकार्डो एक अच्छा विकल्प है. त्वचा का रंग निखारने ,कैंसर को मात देने और डायबिटीज को काबू में रखने जैसे गुण इसमें  है |  सुबह के नास्ते में अवकार्डो को मैस करके ब्रेड पर लगा ले और उसपर अंडे की भुर्जी रखकर सर्व करें | 


मिक्स स्प्राउट्स  टोस्ट (Bread  recipe)
ज्यादातर महिलाएं स्प्राउट्स यानी अंकुरित अनाज को वर्क आउट करने वालों की डाइट मानती है ,लेकिन ऐसा नहीं है इसे बच्चे, बड़ों , महिलाओं और बुजुर्गों को भी अपनी डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए | इसमें विटामिन, मिनरल्स व प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होता है | ब्रेड टोस्ट करके उसके ऊपर मिक्स्ड स्प्राउट्स फैलाएं ऊपर से नमक, चाट मसाला व नींबू का रस हल्का सा डालें और सेहतमंद नाश्ता करें सर्व करें 


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Saturday, March 7, 2020

Upbringing will be equally respected

Upbringing will be equally respected 

a mother with childIndian society has been a male dominated society from the beginning, but it is also true that with time the thinking is changing. Women are becoming aware of their rights and society is concerned about their concerns. Today women are waving their success in every field, in such a situation, it seems to be a big difference between a son and a daughter, if you want your daughter to debate it seems like if the daughter also progresses in her life like a son, So give both of them a similar upbringing from childhood, that the feeling of having a boy or a girl in their mind is actually that age of childhood when you want to express your child's personality May car | So, why not raise your daughters in such a way that they never feel that they are less than boys in any way.



The foundation will spread from childhood
Often, parents give young girls dolls and boys with cars to play in childhood, which is not right from the point of view of similar upbringing. Both children should be brought with similar toys to play so that they will have an equal opportunity to choose toys of their choice. If both son and daughter will be shown from childhood that both are equal in ability and status, then believe me that by growing up, they will become confident citizens with strong personality.

  Snapped
The child's mind is very soft and parents' behavior towards each other has a huge impact on him. Therefore, while talking in front of children, always take care that no such thing is done in which the boy shows discrimination against the girl. Also take care that during the conversation at home, the language of respectful women should be used. With this, boys will get used to respecting women, while younger girls also start to understand their importance from childhood and their self-confidence will grow.

Listen to the mind of the children

It is not that you always keep learning something in the affair of raising the son and daughter equally. Children are very sensitive, so along with giving them the right education, it is very important to know their thoughts. The easiest way to do this is that by watching their favorite serials or listening to the story of choice, ask them how they would feel if the hero's role in it was heroine. There are different views of son and daughter in this, but it will help you to understand in which direction their thinking is going. After listening to him, you must also put your thoughts before him so that he can understand that a woman can also be the hero of a story.

So that opportunities are equal

The most essential condition for raising a child as a strong woman is that she is like a boy. Equal opportunities should be given to move ahead, whether it is to learn wrestling instead of learning to cook or to fly an airplane because of taking care of home. We have to understand that it is grossly unfair to distribute work on the basis of just taking, whereas the basis of it should be interest and ability. Similarly, boys should also be taught to do household work so that they do not have this feeling in their mind, or it is the work of women. It means to start with small work at home. That with the help of words, women can not be given equal status as men in the society, but for this we will have to bring a big change in our thinking and behavior.


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आपकी बातों में है दम ?


आपकी बातों में है दम ?

  • मुझे लगता है ,ऐसा ही होना चाहिए ,पर फिर भी सोच लीजिये क्या करना है। 
  • मेरी राय में इस प्रोजेक्ट पर ऐसे काम किया जाए तो बेहतर परिणाम मिलेंगे। पर अंतिम निर्णय आपको ही   लेना है ,मैं इस क्षेत्र की एक्सपर्ट तो नहीं हूँ इसलिए पुरे विश्वाश से नहीं कह सकता। 




अपनी बात या वाक्यों को बीच में ही अधूरा छोड़ देने या उसे पूरी दृढ़ता से न कहने की महिलाओं में आदत होती है ,चाहे कार्यक्षेत्र में हो या रोजमर्रा की ज़िन्दगी में  आने वाली स्थितियों व् समाज से जुडी घटनाओं के सम्बन्ध में। पर क्या ,आपने कभी गौर किया है की आपका  स्वभाव आपकी पूरी ज़िन्दगी पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष  रूप  से असर डाल रहा है ?अब सवाल यह है की आप महिलाएं अपनी बात को पूरी दृढताता से लोगों के सामने आखिर रॉकग क्यों नहीं पाती है ?

हिचकिचाहट आती है आड़े
महिलाओं  चाहे  पक्का यकीन हो की वे जो कह रहीं है ,वह शत -प्रतिशत सही है ,फिर भी अपनी बात कहने के बाद अकसर बात अधूरी छोड़ देती  हैं ,ताकि   कुछ गलत होने पर उन्हें दोष न दिया जाए या कोई उनकी राय की आलोचना न करे। पर ,पुरुष के अंदर इस तरह की कोई हिचकिचाहट नहीं होती है।  उन्हें जो भी होती है। उन्हें जो भी कहना होता है ,वे अष्पष्ट शब्दों में कह देतें है , इसलिए हर जगह उनकी बात सुनी जाती है। वे जो राय देतें हैं या विचार रखतें है ,उसे केकर इतने विश्वाश से  भरे होते हैं की उन्हें यह नहीं लगता  की वे कुछ गलत राय दे रहे हैं | फिर चाहे वे किसी क्षेत्र के विद्वान के सामने ही अपने विचार क्यों न रख रहे हों। यही वजह है की अक्सर पुरुष को किसी महिला को ज़रुरत से ज्यादा समझाते हुए देखा जा सकता है। इस तरह वे अपनी बुद्धिमता का प्रदर्शन करते हैं और महिलाये बेहतर जानकारी रखने के बावजूद हिचकिचाहट की वजह से स्वयं को कमतर साबित  करती हैं। महिलाओं के इस स्वभाव के लिए बहुत -कुछ हमारा पुरुष सत्तात्मक समाज ज़िम्मेदार है,जहां सर्दियों  से घर -परिवारों में महिलाओं की आवाज सुनी ही नहीं जाती है। गलत साबित होने का यह डर ही महिलाओं को पुरे आत्मविश्वाश के साथ अपनी बात दूसरों के सामने रखने से रोकता है। 

कोई दोष न दें 
कार्यक्षेत्र में अगर देखें तो महिलाओं खुलकर अपनी बात रखने से बचती हैं |  बहुत सशक्त ढंग से कुछ भी बात करने से इसी समस्या पर ध्यान दिलाने से वे घबराती हैं।  हर बात पर हामी भर देती है और उसके बाद स्वयं को ही इतना कुश्ती हैं कि तनावग्रस्त हो जाती हैं  | एक झुंझलाहट उन्हें घेरे रहती हैं कि मैं क्यों अपनी बात नहीं कह पाई  जो ठीक नहीं था उसका विरोध क्यों नहीं कर पाई  कुछ गलत ना हो जाए इस एहसास से बचने के लिए वे गलती ही करती जाती है |  वें
 बातें जो अक्सर महिलाएं कार्यक्षेत्र में कहती हैं और क्यों उन्हें कहना नहीं चाहिए , यह जानना जरूरी है, अपनी बात को दमदार तरीके से रखने के लिए अपनी बातचीत में किन वाक्यों का इस्तेमाल आज से बंद करें , आइए जाने :

मैं गलत हो सकती हूँ 

अपनी बात यह कहते हुए कभी ख़त्म या अधूरी ना छोरे कि मैं गलत हो सकती हूं | अपने विचारों व राय का सम्मान करें और उन पर कायम रहें |  अगर आपको विश्वास है कि आप सही बात कह रहे हैं तो उसे  इस तरह से नहीं कहे कि कोई आपकी विश्वसनीयता पर संदेह करें |  बहुत मेहनत कर आप जिस मुकाम पर पहुंची हैं उसे बेकरार ना होने दें अपनी बात पर जोर देते हुए कहा कि मेरा मानना यह है |  आप जो कहती हैं , उस पर प्रश्न चिन्ह न लगने दें

 मुझे  खेद है 

जिसका जो काम है अगर आप उसे वह करने को कहती हैं तो यह न सोचे कि आप उसे परेशान कर रही हैं जो काम आपको करवाना है , उसके लिए विनती करना या उनसे पूछना कि क्या या काम कर दोगे और जब वह करने लगे तो यह कहना कि तुम्हें परेशान कर रही हूं उसके लिए सॉरी  ,यह वाक्य न दोहराएं |  आप इसके बजाय कह सकती हैं , यह  एक बहुत जरूरी काम है और मैं जानती हूं इसे करना में तुम मेरी मदद करोगे वह काम इसके लिए उन्हें वेतन मिल रहा है, करने के लिए कोई तब तक माना नहीं मना नहीं करता जब तक कि उस व्यक्ति का स्वभाव ही खराब ना हो | अगर सामने वाला भी आपके दिए गए काम को करने से कतराते है या उसे टालता  है तो इसमें आपकी कोई गलती नहीं |  ऐसे लोगों से निबटने की जिम्मेदारी मैनेजमेंट की है | 

मैं कोई एक्सपर्ट नहीं हूँ 

आपको कोई जिम्मेदारी आप की कार्य क्षमता को देखते हुए दी गई है |  यह कहना बंद करें, मैं कोई एक्सपर्ट तो नहीं हूं |  अगर आप अपना काम अच्छी तरह से जानती हैं तो अपनी बातचीत के जरिए अपनी कार्यक्षमता को लेकर अविश्वसनीयता को पैदा करने से बचें  | एक्सपर्ट  न सही ज्ञान तो तो आपके पास है ही और उसके साथ आपका आत्मविश्वास आप को सफल बनने में मदद करेगा |

अपने सवाल और सुझाव हमें comment box में जरूर बताएं।

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